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1997 से पलवल की ज़मीन में शर्तें लिखित में उसी दिन WhatsApp पर जवाब

गाइड · विक्रेता

विरासत की ज़मीन बेचने का क्रम — इंतक़ाल पहले, बाज़ार बाद में

पढ़कर सुनाएँ

सबसे पहले इंतक़ाल क्यों?

जब तक विरासत का इंतक़ाल मंज़ूर नहीं, जमाबंदी में मृतक का ही नाम चलता है — और समझदार ख़रीदार उस रिकॉर्ड पर पैसा नहीं देता। इंतक़ाल सस्ता, सरकारी-फ़ीस वाला क़दम है (आधिकारिक तौर पर ₹200 + ₹50 = ₹250) जिसे परिवार बरसों टालते हैं और फिर हफ़्ते में चाहते हैं। मंज़ूरी के साथ हर वारिस का हिस्सा भी दर्ज हो जाता है — आधा झगड़ा वहीँ ख़त्म।

विरासत पहले

रिकॉर्ड का जवाब बिकता है, परिवार की कहानी नहीं। इंतक़ाल मंज़ूर — फिर बाज़ार।

हिस्सेदार कौन-कौन गिने जाएँगे?

क़ानून की सूची, परिवार की बैठक की सूची नहीं: विवाहित बेटियों के दर्ज हिस्से भी उतने ही असली हैं, और जो वारिस पहले गुज़र चुका है उसकी संतान उसके हिस्से में खड़ी होती है। जिस बिक्री में कोई क़ानूनी हिस्सेदार छूटा, वह छोटी बिक्री नहीं — भविष्य का बँटवारा-मुक़दमा है जिसके साथ एक ख़रीदार नत्थी है। नाबालिग़ वारिस का हिस्सा चाचा-ताऊ की सहमति से नहीं बिकता — उसके लिए अदालत (guardianship) की मंज़ूरी चाहिए, और उसका समय सौदे के कैलेंडर में पहले से रखिए।

कोई वारिस विदेश में हो तो?

FEMA विरासत का दरवाज़ा खुला रखता है — NRI/OCI वारिस खेती की ज़मीन विरासत में ले भी सकता है और बाक़ी वारिसों के साथ बेच भी सकता है। चाहिए बस तैयारी: विदेश में बना मुख़्तारनामा सही प्रमाणन (दूतावास/अपॉस्टिल) से आकर धारा-33 की कसौटी पूरी करे, PAN बना हो (ख़रीदार को NRI हिस्से पर अलग TDS चलाना है), और पैसे के रास्ते की बैंक-योजना पहले से तय हो। POA सबसे लंबा काम है — बात पक्की होते ही शुरू कराइए।

बेचने का सीधा क्रम (सूची)

  1. विरासत का इंतक़ाल मंज़ूर कराइए — हिस्से दर्ज हों
  2. हर दर्ज हिस्सेदार की पहचान और सहमति — बेटियाँ शामिल
  3. नाबालिग़ हिस्सा हो तो अदालत की मंज़ूरी का समय जोड़िए
  4. विदेशी वारिस का POA (धारा-33) और PAN पहले
  5. तब बयाना — लिखित, बैंक से; फिर रजिस्ट्री और उसी हफ़्ते नया इंतक़ाल

स्रोत

  1. अंग्रेज़ी गाइड (मूल) — 17 जुलाई 2026
  2. इंतक़ाल फ़ीस — राजपत्रित ₹250 — jamabandi.nic.in (MutFees), 17 जुलाई 2026

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विरासती ज़मीन पर सलाह चाहिए?

गाँव-खसरा और वारिसों की गिनती भेजिए; जवाब में सही क्रम, लिखित में।

हम क्या काम लेते हैं

पलवल ज़िले और नूंह (मेवात) ज़िले में ज़मीन की ख़रीद, बिक्री या रिकॉर्ड की जाँच — प्लॉट, खेती की ज़मीन, कमर्शियल और औद्योगिक टुकड़े — लिखित ज़रूरत के आधार पर।

हम क्या काम नहीं लेते

हम ऐसा कोई काम नहीं लेते जिसका अकेला मक़सद किसी मालिक पर दबाव डालकर मजबूरी में या जानबूझकर कम दाम पर बिक्री कराना हो। क़ीमत का अंदाज़ा चाहिए तो पहले गाँव और खसरा भेजिए।

आप क्या भेजें

ख़रीद: मक़सद, गाँव या इलाक़ा, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, बजट, समय-सीमा, और पैसे का इंतज़ाम हुआ या नहीं। बिक्री: गाँव, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, ज़मीन अकेले की है, साझा है या विरासत में मिली, सभी मालिक सहमत हैं या नहीं, माँगी क़ीमत, समय-सीमा और हाथ में काग़ज़। जाँच: ज़िला, तहसील और गाँव, खसरा या खेवट, सौदा किस चरण में है, और आपकी चिंता क्या है।

फिर क्या होता है

कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है। शाम 7 बजे के बाद और रविवार को जवाब अगले कार्य-दिवस आता है। आपकी ज़रूरत लिखित में दोहराई जाती है और किसी भी टुकड़े की बात से पहले रिकॉर्ड की पहली जाँच होती है।

फ़ीस और काम का दायरा किसी भी काम से पहले लिखित में तय होते हैं। मौक़े पर जाना तभी होता है जब ज़रूरत लिखित में हो और रिकॉर्ड की पहली जाँच हो चुकी हो। आपकी मंज़ूरी के बिना कुछ भी हमारे दफ़्तर से बाहर साझा नहीं होता; जहाँ किसी साझेदार की ज़रूरत हो, उसका नाम पहले लिखित शर्तों में आता है।

पहले — आपको क्या चाहिए?

सबसे तेज़ — एक टैप

WhatsApp पर बताइए

भरने वाला एक संदेश खुलता है: पंक्तियों के जवाब लिखिए, कुछ भी बदलिए, फिर भेजिए।

WhatsApp पर भेजें

इस फ़ोन या कंप्यूटर पर WhatsApp नहीं है? कॉल कीजिए +91 70155 03815 (सोम–शनि 10:00–19:00 IST · रविवार बंद).

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