गाइड · प्रक्रिया
इंतक़ाल: जब तक रिकॉर्ड न बदले, काम अधूरा है
रजिस्ट्री के बाद फ़ाइल कैसे चलती है?
रजिस्ट्रेशन से सूचना अपने-आप पटवारी तक जाती है (पुरानी भाषा का “तीसरा पर्चा”), एंट्री बनती है, फिर मंज़ूरी का इंतज़ार। तीन ठिकाने हैं, तीन जगह फ़ाइल टिक सकती है — इसीलिए ऑनलाइन स्थिति-जाँच है: रजिस्ट्री के पखवाड़े बाद देखिए, फिर महीने-महीने; “एंट्री है, मंज़ूरी नहीं” तिमाही से लंबा खिंचे तो विनम्र तहसील-यात्रा बनती है।
आधिकारिक फ़ीस — ₹200 + ₹50, राजपत्र से। इससे बहुत ऊपर की माँग पर सवाल बनता है।
इंतक़ाल सिर्फ़ बिक्री का नहीं होता?
हर वह घटना जो हक़ बदलती है, अपना इंतक़ाल रखती है: विरासत (इसे टालना अगली पीढ़ी पर भारी पड़ता है), दान/हिबा, रहन (mortgage), और बँटवारा — जो “सबका आधा-आधा” को “यह टुकड़ा मेरा” में बदलता है। हर क़िस्म वही तीन पड़ाव चलती है, और हर बिना-मंज़ूरी एंट्री एक ही जाति की दिक़्क़त है: हक़ जो हक़ीक़त में है पर रिकॉर्ड में नहीं — और ख़रीदार उसी हिसाब से दाम काटता है।
ख़रीदार-विक्रेता दोनों के लिए एक आदत
रजिस्ट्री के उसी हफ़्ते इंतक़ाल की एंट्री सुनिश्चित कीजिए और रसीद-रेफ़रेंस फ़ाइल में रखिए। ख़रीदार के लिए यह मालिकाना पूरा करता है; विक्रेता के लिए ज़िम्मेदारी की तारीख़ साफ़ काटता है। “रजिस्ट्री हो गई, अब क्या” का सही जवाब हमेशा यही पन्ना है। जब बात असली ज़मीन तक पहुँचे: इंतकाल मेल न खाए — तो टाइटल जँचवाइए।
स्रोत
- अंग्रेज़ी गाइड (मूल) + फ़ीस-राजपत्र — jamabandi.nic.in, 17 जुलाई 2026
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इंतक़ाल अटका है?
ब्योरा भेजिए; तहसील-वार सही रास्ता लिखित में। कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है।
पलवल ज़िले और नूंह (मेवात) ज़िले में ज़मीन की ख़रीद, बिक्री या रिकॉर्ड की जाँच — प्लॉट, खेती की ज़मीन, कमर्शियल और औद्योगिक टुकड़े — लिखित ज़रूरत के आधार पर।
हम ऐसा कोई काम नहीं लेते जिसका अकेला मक़सद किसी मालिक पर दबाव डालकर मजबूरी में या जानबूझकर कम दाम पर बिक्री कराना हो। क़ीमत का अंदाज़ा चाहिए तो पहले गाँव और खसरा भेजिए।
ख़रीद: मक़सद, गाँव या इलाक़ा, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, बजट, समय-सीमा, और पैसे का इंतज़ाम हुआ या नहीं। बिक्री: गाँव, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, ज़मीन अकेले की है, साझा है या विरासत में मिली, सभी मालिक सहमत हैं या नहीं, माँगी क़ीमत, समय-सीमा और हाथ में काग़ज़। जाँच: ज़िला, तहसील और गाँव, खसरा या खेवट, सौदा किस चरण में है, और आपकी चिंता क्या है।
कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है। शाम 7 बजे के बाद और रविवार को जवाब अगले कार्य-दिवस आता है। आपकी ज़रूरत लिखित में दोहराई जाती है और किसी भी टुकड़े की बात से पहले रिकॉर्ड की पहली जाँच होती है।
फ़ीस और काम का दायरा किसी भी काम से पहले लिखित में तय होते हैं। मौक़े पर जाना तभी होता है जब ज़रूरत लिखित में हो और रिकॉर्ड की पहली जाँच हो चुकी हो। आपकी मंज़ूरी के बिना कुछ भी हमारे दफ़्तर से बाहर साझा नहीं होता; जहाँ किसी साझेदार की ज़रूरत हो, उसका नाम पहले लिखित शर्तों में आता है।
सबसे तेज़ — एक टैप
WhatsApp पर बताइए
भरने वाला एक संदेश खुलता है: पंक्तियों के जवाब लिखिए, कुछ भी बदलिए, फिर भेजिए।
WhatsApp पर भेजेंइस फ़ोन या कंप्यूटर पर WhatsApp नहीं है? कॉल कीजिए +91 70155 03815 (सोम–शनि 10:00–19:00 IST · रविवार बंद).
✓ WhatsApp में संदेश तैयार है।
वहीं से भेजिए। कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है।
इस फ़ोन या कंप्यूटर पर WhatsApp नहीं है? कॉल कीजिए +91 70155 03815 (सोम–शनि 10:00–19:00 IST · रविवार बंद).