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1997 से पलवल की ज़मीन में शर्तें लिखित में उसी दिन WhatsApp पर जवाब

गाइड · विक्रेता

प्रॉपर्टी डीलर का कमीशन: नियम 10 क्या कहता है

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नियम 10 छपे शब्दों में क्या कहता है?

नियम 10, जैसा हरियाणा सरकार के गज़ट (असाधारण), 6 जनवरी 2009, पेज 18 में छपा है, कहता है कि लाइसेंसधारी को सौदे की तय रक़म पर सिर्फ़ एक प्रतिशत कमीशन मिलेगा, जो बेचने वाला और ख़रीदार देंगे — यानी दोनों से आधा-आधा प्रतिशत — सौदा पक्का होने पर, उनके उस समझौते के मुताबिक़ जो डीलर के रजिस्टर में दर्ज हो, सही रसीद के साथ।

सीधी बात: तय दाम के हर ₹1,00,000 पर नियम का आँकड़ा कुल ₹1,000 है — ₹500 ख़रीदार से, ₹500 बेचने वाले से। यह सौदा पक्का होने पर बनता है, पहली मुलाक़ात या टोकन पर नहीं, और भुगतान डीलर के रजिस्टर में रसीद के साथ दर्ज होता है। यही नियम किराये और लीज़ के सौदों के लिए अलग आँकड़ा रखता है; हाईलाइन सिर्फ़ ख़रीद और बिक्री करवाता है — किराया या लीज़ नहीं, इसलिए वह हिस्सा यहाँ नहीं लिखा।

2008 का क़ानून डीलर से क्या माँगता है?

हरियाणा प्रॉपर्टी डीलर क़ानून, 2008 ("Haryana Act 38 of 2008") कहता है कि कोई भी प्रॉपर्टी डीलर लाइसेंस के बिना ख़रीद या बिक्री का सौदा नहीं करा सकता (धारा 3)। अर्ज़ी कलेक्टर को जाती है — हरियाणा के ज़िले में यह डिप्टी कमिश्नर हैं — (धारा 4), और कलेक्टर पाँच साल का लाइसेंस देते हैं (2009 के नियमों का नियम 7)। क़ानून की परिभाषा में प्रॉपर्टी डीलर में प्रॉपर्टी कंसल्टेंट और एस्टेट एजेंट भी शामिल हैं (धारा 2(h))। नियम यह भी कहते हैं कि लाइसेंसशुदा डीलर दफ़्तर में लाइसेंस नंबर लगाए और सौदों का रजिस्टर रखे (नियम 9)।

क्या बाज़ार नियम 10 पर चलता है?

हमेशा नहीं। समाचार साइट (ThePrint) की 8 सितंबर 2025 की ख़बर के मुताबिक़ नियम 10 के तहत डीलर हर तरफ़ से आधा प्रतिशत ले सकते हैं, और कई क़स्बों में चलन हर तरफ़ से 1% का है। जो भी कहा जाए, जवाब एक ही है: फ़ीस, उसे कौन देगा और किस घटना पर बनेगी — यह सब किसी भी काम से पहले लिखित में।

सेहतमंद समझ कैसी दिखती है?

चार आदतें: शर्तें पहली मुलाक़ात से पहले लिखी जाएँ — कौन, किसकी तरफ़ से, किस काम पर, कितनी फ़ीस, किस घटना पर; फ़ीस सौदा पक्का होने पर बने, बयाने पर नहीं — बयाने पर पैसा पाने वाला सौदे शुरू कराने का इनाम पा रहा है, पूरा कराने का नहीं; जाँच बिचौलिए से स्वतंत्र चले — जिसका फ़ायदा सौदा होने में है, वह “सब ठीक है” का सर्टिफ़िकेट नहीं दे सकता; और हर रुपया बैंक से, रसीद के बदले — नियम 10 का रजिस्टर भी यही माँगता है। ऐसा एक पन्ने का लिखित समझौता दो झगड़े पहले ही ख़त्म कर देता है: “दोनों तरफ़ से कमीशन” और “ज़मीन पहले मैंने दिखाई थी”।

सौदा पक्का होने पर

फ़ीस की सही घड़ी। बयाने पर फ़ीस = अधूरे सौदों का धंधा।

भूमिका खोलने वाले चार सवाल कौन-से हैं?

  1. इस सौदे में आपको कौन दे रहा है — एक पक्ष या दोनों?
  2. फ़ीस कितनी, किस घटना पर, लिखित में?
  3. इस ज़मीन में आपका कोई हिस्सा/बयाना/रिश्ता तो नहीं?
  4. आपने ख़ुद क्या जाँचा है — और क्या सिर्फ़ विक्रेता से सुनकर दोहरा रहे हैं?

हाईलाइन कितनी फ़ीस लेता है?

हाईलाइन अपनी फ़ीस नहीं छापता। फ़ीस और काम का दायरा किसी भी काम से पहले लिखित में तय होते हैं; शर्तों में लिखा होता है कि हम किसकी तरफ़ से हैं और फ़ीस किस घटना पर बनेगी, और दाम में कोई छिपा मार्जिन कभी नहीं। नूंह ज़िले का काम भी पलवल दफ़्तर से ख़ुद होता है; कोई स्थानीय साझेदार हो तो उसका नाम पहले लिखित शर्तों में आता है। जब बात असली ज़मीन तक पहुँचे: पलवल दफ़्तर के साथ काम का ख़र्च — लिखित में।

स्रोत

  1. Haryana Regulation of Property Dealers and Consultants Rules, 2009 — नियम 7, 9 और 10 — हरियाणा सरकार का गज़ट (असाधारण), 6 जनवरी 2009, पेज 17–18 — सोनीपत ज़िले की वेबसाइट पर प्रति; दो बार पढ़ा, 1 अक्टूबर 2026
  2. Haryana Regulation of Property Dealers and Consultants Act, 2008 — धाराएँ 2(h), 3 और 4 — हरियाणा सरकार का गज़ट (असाधारण), 13 अक्टूबर 2008, पेज 478; पढ़ा 1 अक्टूबर 2026
  3. ThePrint (Sushil Manav) — 8 सितंबर 2025 — नियम 10 और हर तरफ़ से 1% वाला चलन

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सौदे में बिचौलिया उलझा है?

हालात लिखिए; जवाब में साफ़ रास्ता — किससे क्या लिखवाना है। कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है।

हम क्या काम लेते हैं

पलवल ज़िले और नूंह (मेवात) ज़िले में ज़मीन की ख़रीद, बिक्री या रिकॉर्ड की जाँच — प्लॉट, खेती की ज़मीन, कमर्शियल और औद्योगिक टुकड़े — लिखित ज़रूरत के आधार पर।

हम क्या काम नहीं लेते

हम ऐसा कोई काम नहीं लेते जिसका अकेला मक़सद किसी मालिक पर दबाव डालकर मजबूरी में या जानबूझकर कम दाम पर बिक्री कराना हो। क़ीमत का अंदाज़ा चाहिए तो पहले गाँव और खसरा भेजिए।

आप क्या भेजें

ख़रीद: मक़सद, गाँव या इलाक़ा, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, बजट, समय-सीमा, और पैसे का इंतज़ाम हुआ या नहीं। बिक्री: गाँव, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, ज़मीन अकेले की है, साझा है या विरासत में मिली, सभी मालिक सहमत हैं या नहीं, माँगी क़ीमत, समय-सीमा और हाथ में काग़ज़। जाँच: ज़िला, तहसील और गाँव, खसरा या खेवट, सौदा किस चरण में है, और आपकी चिंता क्या है।

फिर क्या होता है

कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है। शाम 7 बजे के बाद और रविवार को जवाब अगले कार्य-दिवस आता है। आपकी ज़रूरत लिखित में दोहराई जाती है और किसी भी टुकड़े की बात से पहले रिकॉर्ड की पहली जाँच होती है।

फ़ीस और काम का दायरा किसी भी काम से पहले लिखित में तय होते हैं। मौक़े पर जाना तभी होता है जब ज़रूरत लिखित में हो और रिकॉर्ड की पहली जाँच हो चुकी हो। आपकी मंज़ूरी के बिना कुछ भी हमारे दफ़्तर से बाहर साझा नहीं होता; जहाँ किसी साझेदार की ज़रूरत हो, उसका नाम पहले लिखित शर्तों में आता है।

पहले — आपको क्या चाहिए?

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