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1997 से पलवल की ज़मीन में शर्तें लिखित में उसी दिन WhatsApp पर जवाब

गाइड · प्रक्रिया

बयाना: छोटा पैसा, बड़े नियम

पढ़कर सुनाएँ

इक़रारनामे में क्या-क्या दर्ज हो? (सूची)

  1. पक्ष — नाम वैसे ही जैसे रिकॉर्ड में हैं
  2. खसरा नंबर और हिस्सा — पूरा और साफ़
  3. कुल दाम, बयाना रक़म, बाक़ी की समय-सारणी
  4. दोनों तरफ़ की चूक पर बयाने का हश्र — संख्या में
  5. रजिस्ट्री की आख़िरी तारीख़; ख़र्च कौन-क्या देगा
  6. क़ब्ज़ा कब मिलेगा — और पहले मिले तो इक़रारनामे की रजिस्ट्री

चूक पर बयाना ज़ब्त — कहाँ तक चलता है?

अनुबंध-क़ानून (धारा 73–74) मुआवज़े को असल नुक़सान और “वाजिब पूर्व-आकलन” की कसौटी पर तौलता है — सज़ा जैसी ज़ब्ती अदालतें काट देती हैं। इसलिए हश्र लिखते समय अदब से लिखिए: रक़में ऐसी जो नुक़सान की सच्ची झलक हों। और स्टाम्प का बहाना कभी मत सुनिए — इक़रारनामे का स्टाम्प ₹100 (Art 5(c)) है; बिना काग़ज़ का बयाना क़ानून में दान जैसा है।

₹100

इक़रारनामे का स्टाम्प — ख़र्च कोई बहाना नहीं।

देने से पहले की आख़िरी जाँच

बयाना जाँच के बाद की चीज़ है, पहले की नहीं: नक़ल-इंतक़ाल-गिरदावरी पढ़े बग़ैर दिया बयाना झगड़े की फ़ीस है। कमरे में सही लोग हों — हर दर्ज हिस्सेदार या उसका वैध मुख़्तार — और जो तय हो, उसी शाम लिखकर (WhatsApp पर ही सही) दोनों तरफ़ से बिना-एतराज़ हो जाए: सस्ता सबूत इसी बाज़ार की सबसे क़ीमती चीज़ है। जब बात असली ज़मीन तक पहुँचे: बयाना लिखने से पहले टाइटल जँचवाइए।

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बयाने की मेज़ पर बैठने वाले हैं?

ब्योरा भेजिए; लिखवाने की पूरी सूची लिखित में। कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है।

हम क्या काम लेते हैं

पलवल ज़िले और नूंह (मेवात) ज़िले में ज़मीन की ख़रीद, बिक्री या रिकॉर्ड की जाँच — प्लॉट, खेती की ज़मीन, कमर्शियल और औद्योगिक टुकड़े — लिखित ज़रूरत के आधार पर।

हम क्या काम नहीं लेते

हम ऐसा कोई काम नहीं लेते जिसका अकेला मक़सद किसी मालिक पर दबाव डालकर मजबूरी में या जानबूझकर कम दाम पर बिक्री कराना हो। क़ीमत का अंदाज़ा चाहिए तो पहले गाँव और खसरा भेजिए।

आप क्या भेजें

ख़रीद: मक़सद, गाँव या इलाक़ा, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, बजट, समय-सीमा, और पैसे का इंतज़ाम हुआ या नहीं। बिक्री: गाँव, ज़मीन की क़िस्म और रक़बा, ज़मीन अकेले की है, साझा है या विरासत में मिली, सभी मालिक सहमत हैं या नहीं, माँगी क़ीमत, समय-सीमा और हाथ में काग़ज़। जाँच: ज़िला, तहसील और गाँव, खसरा या खेवट, सौदा किस चरण में है, और आपकी चिंता क्या है।

फिर क्या होता है

कार्य-समय (सोम–शनि 10–7) में उसी दिन जवाब — ज़रूरी हो तो कॉल कीजिए। ज़मीन ढूँढने या रिकॉर्ड जाँचने में ज़्यादा समय लगता है। शाम 7 बजे के बाद और रविवार को जवाब अगले कार्य-दिवस आता है। आपकी ज़रूरत लिखित में दोहराई जाती है और किसी भी टुकड़े की बात से पहले रिकॉर्ड की पहली जाँच होती है।

फ़ीस और काम का दायरा किसी भी काम से पहले लिखित में तय होते हैं। मौक़े पर जाना तभी होता है जब ज़रूरत लिखित में हो और रिकॉर्ड की पहली जाँच हो चुकी हो। आपकी मंज़ूरी के बिना कुछ भी हमारे दफ़्तर से बाहर साझा नहीं होता; जहाँ किसी साझेदार की ज़रूरत हो, उसका नाम पहले लिखित शर्तों में आता है।

पहले — आपको क्या चाहिए?

सबसे तेज़ — एक टैप

WhatsApp पर बताइए

भरने वाला एक संदेश खुलता है: पंक्तियों के जवाब लिखिए, कुछ भी बदलिए, फिर भेजिए।

WhatsApp पर भेजें

इस फ़ोन या कंप्यूटर पर WhatsApp नहीं है? कॉल कीजिए +91 70155 03815 (सोम–शनि 10:00–19:00 IST · रविवार बंद).

या पहले यहाँ जवाब दीजिए

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