गाइड · प्रक्रिया
बयाना: छोटा पैसा, बड़े नियम
इक़रारनामे में क्या-क्या दर्ज हो? (सूची)
- पक्ष — नाम वैसे ही जैसे रिकॉर्ड में हैं
- खसरा नंबर और हिस्सा — पूरा और साफ़
- कुल दाम, बयाना रक़म, बाक़ी की समय-सारणी
- दोनों तरफ़ की चूक पर बयाने का हश्र — संख्या में
- रजिस्ट्री की आख़िरी तारीख़; ख़र्च कौन-क्या देगा
- क़ब्ज़ा कब मिलेगा — और पहले मिले तो इक़रारनामे की रजिस्ट्री
चूक पर बयाना ज़ब्त — कहाँ तक चलता है?
अनुबंध-क़ानून (धारा 73–74) मुआवज़े को असल नुक़सान और “वाजिब पूर्व-आकलन” की कसौटी पर तौलता है — सज़ा जैसी ज़ब्ती अदालतें काट देती हैं। इसलिए हश्र लिखते समय अदब से लिखिए: रक़में ऐसी जो नुक़सान की सच्ची झलक हों। और स्टाम्प का बहाना कभी मत सुनिए — इक़रारनामे का स्टाम्प ₹100 (Art 5(c)) है; बिना काग़ज़ का बयाना क़ानून में दान जैसा है।
इक़रारनामे का स्टाम्प — ख़र्च कोई बहाना नहीं।
देने से पहले की आख़िरी जाँच
बयाना जाँच के बाद की चीज़ है, पहले की नहीं: नकल-इंतकाल-गिरदावरी पढ़े बग़ैर दिया बयाना झगड़े की फ़ीस है। कमरे में सही लोग हों — हर दर्ज हिस्सेदार या उसका वैध मुख़्तार — और जो तय हो, उसी शाम लिखकर (WhatsApp पर ही सही) दोनों तरफ़ से बिना-एतराज़ हो जाए: सस्ता सबूत इसी बाज़ार की सबसे क़ीमती चीज़ है।
स्रोत
- अंग्रेज़ी गाइड (मूल) — धाराओं सहित — /guides/token-bayana-agreement-explained/ · 17 Jul 2026
संबंधित सवाल
Keep reading
यहाँ से शुरू करें
बयाने की मेज़ पर बैठने वाले हैं?
ब्योरा भेजिए; लिखवाने की पूरी सूची उसी दिन, लिखित में।
सबसे तेज़ — एक टैप
WhatsApp पर बताइए
A pre-filled requirement starter opens; edit anything before sending. Same-day reply within working hours.
Send on WhatsApp✓ Requirement received.
We reply on WhatsApp within working hours (10:00–19:00 IST). Nothing is shared outside the practice.