गाइड · अधिकार
अधिग्रहण का मुआवज़ा: परत-दर-परत, ताकि अवॉर्ड पढ़ना आ जाए
मुआवज़ा बनता कैसे है?
क्रम याद रखिए: (1) बाज़ार-मूल्य, (2) × गुणक — पलवल की परियोजना-छूई पट्टी ज़्यादातर 10-किमी दायरे में है, यानी 1.25, (3) + ज़मीन पर खड़ी चीज़ों की अलग क़ीमत, (4) × 2 — यानी 100% सोलेशियम पूरे पर, (5) + 12% सालाना उस तारीख़ से। अवॉर्ड में हर परत अलग दिखनी चाहिए; सबसे आम कमज़ोरी गुणक की परत में मिलती है — दूरी जो 1.25 माँगती है, वहाँ कम लगा दिया जाना। वही चुनौती का आधार बनता है।
मूल्य · गुणक · परिसंपत्ति · सोलेशियम 100% · 12% सालाना — अवॉर्ड की पूरी गिनती।
ई-भूमि विंडो और अधिग्रहण में फ़र्क़ क्या है?
ई-भूमि स्वैच्छिक पेशकश है — आप प्रस्ताव देते हैं, एजेंसी चुनती है, बंद विंडो किसी को बाध्य नहीं करती। अधिग्रहण क़ानूनी प्रक्रिया है जिसमें ऊपर की परतें हक़ हैं। दोनों को मिलाकर डराने वाली बातें — “अभी बेचो वरना अधिग्रहण में सस्ता जाएगा” — मोलभाव है, क़ानून नहीं: स्वैच्छिक पेशकश की तुलना हमेशा अधिग्रहण-फ़्लोर से करके ही हाँ-ना कहिए।
धारक को कब क्या करना चाहिए? (सूची)
- नोटिफ़िकेशन ख़ुद पढ़िए — गाँव नहीं, खसरा-सूची देखिए
- अपनी दूरी की परत समझिए — 10 किमी के भीतर गुणक 1.25
- खड़ी परिसंपत्तियों की सूची-फ़ोटो अभी बनाइए
- अवॉर्ड आए तो पाँचों परतें अलग-अलग मिलाइए
- पतली परत दिखे तो तय समय में आपत्ति/चुनौती — देर हक़ खा जाती है
स्रोत
- अंग्रेज़ी गाइड (मूल) — अधिसूचनाएँ सहित — /guides/land-acquisition-compensation-rights-haryana/ · 17 Jul 2026
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